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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

यं यं पृच्छत्यसौ गाधिर्जनं जातकुतूहलः । तस्य तस्य मुखादेव श्रृणोत्यास्वादयत्यपि ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार कुतूहल से भरे हुए गाधि जिस-जिस मनुष्य को देखते थे उस-उस मनुष्य से पूछते थे और उसी के मुख से सुनते थे ओर आस्वादन करते थे