Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
चामरौघा इमे चन्द्रकरसंपिण्डपाण्डुराः ।
स्थिरनिर्झरसंकाशाः काशपुष्पचया इव ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
ये चन्द्रमा की किरणों की राशि के सदृश श्वेत, निश्चल निर्झर के
समान, तथा आकाशो के फूलों की राशि के समान चँवरों का समूह सामने है