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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

कान्ताभिरवधूयन्ते बालव्यजनराजयः । इमास्ता वनवल्लीभिर्दीप्यमाना इवर्द्धयः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

मनोहर ललनाएँ इन चँवरों को डुला रही हैं, मानों वन की लताएँ खिले हुए पुष्पों की समृद्धि कँपाती हो