Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
इमास्ता मत्तमातङ्गघटा घटितदिक्तटाः ।
संकल्पपादपा मेरोरिव श्रृङ्गपरम्पराः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
कल्पवृक्ष
से युक्त मेरु पर्वत की शिखर परम्परा के समान ये वे सब दिशाओं के भागों में उन्मत्त हाथियों के जम
घर हैं