Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
इमास्ताः सर्ववस्त्वोघाः सर्वाभिमतदास्तताः ।
कल्पवृक्षलताकुञ्जसुन्दर्यो गृहपङ्क्तयः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
ये कल्पवृक्ष लताओं के कुंजों की तरह सुन्दर, सब अभीष्ट वस्तुओं
को देनेवाली एवं हर एक वस्तुओं से भरी हुई घरों की पंक्तियाँ विस्तृत हैं