Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
सत्यं स्वप्न इवायं मे जाग्रद्भूतः पुनः स्थितः ।
न जाने किंकृतोत्थाना मायेयं प्रविजृम्भते ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
यह बिलकुल सत्य है कि यह समाचार पहले स्वप्न की तरह देखा गया फिर
जाग्रदूभूत होकर सामने खड़ा है, न मालूम किससे, क्यों और किसलिये इस माया का बार-बार आविर्भाव
होता है