Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

भ्रमं यं पश्यति मनो वासनामलमालितम् । स्वप्नवत्स कथं देव जाग्रत्यपि हि दृश्यते ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे देव वासनारूपी मल से मलिन मन जिस भ्रम को स्वप्न की नाई देखता है, वह जाग्रदवस्था मेँ भी क्‍यों दिखाई देता है ?