Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
गाधिरुवाच ।
देव यैषा त्वया माया दर्शिताऽतितमोमयी ।
महीं प्रातरिवादित्यस्तां मे प्रकटतां नय ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवान्, यह जो आपने अत्यन्त अन्धकारमय माया दिखाई है, उसको
आप जिस प्रकार सूर्य प्रातःकाल में पृथिवी को प्रकट करते हैं उसी प्रकार प्रकट कीजिये