Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
सत्यं पृथ्व्यादि चित्तस्थं न बहिष्ठं कदाचन ।
अङ्कुरस्थः पल्लवस्तु तस्माद्यस्मात्फलश्रियः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
यह
सत्य है कि पूर्वोक्त पृथिवी आदि चित्त में स्थित हैं बाहर कभी नहीं रहते हैं, क्योकि यह देखा गया है कि
पल्लव अंकुर में स्थित है और फल की शोभा पल्लवाधीन है