Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
रूपालोकमनस्कारतत्ताकालक्रियात्मकम् ।
कुम्भकारो घटमिव चेतो हन्ति करोति च ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
वर्तमान विषय में चक्षुरादि इन्द्रियों
द्वारा रूपालोक प्रत्यय, भावी विषय में मनस्कार प्रत्यय, (अर्थात् भावी काल में विषय का मन से समर्थन
किया जाता है, अतः भावी विषय में मनस्कार प्रत्यय होता है) एवं अतीत विषय में तत्ता प्रत्यय होता है,
क्योकि अतीत स्मृति का विषय होता है अतः तीनों प्रत्ययोके ज्ञापक तीन काल हुए और कालो की
व्यंजिका सूर्य की क्रिया है इसलिए सबका पर्यवसान क्रिया में ही हुआ | इस क्रियात्मक वस्तुओं का
उपसंहार और सृष्टि मन स्वयं ऐसे ही करता है जैसे कि कुम्हार घट का नाश और सृष्टि करता है