Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
आबालमेतत्पुरुषैः सर्वैरेवानुभूयते ।
स्वप्नभ्रममदावेगरागरोगादिदृष्टिषु ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस पूर्वोक्त बात का सब बालक, वृद्ध और वनिताएँ स्वप्न, भ्रम, मद, आवेग, राग, रोग आदि की
बुद्धियों में अनुभव करते हैं अर्थात् स्वप्नभ्रमादि सब चित्त के ही धर्म हैं