Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
चित्ते वृत्तान्तलक्षाणि संस्थितान्यात्तवासने ।
पादपे फलपुष्पाणि मूलाक्रान्तावनाविव ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जड़ों से (मूलो से)
पृथिवी को आक्रान्त किये हुए वृक्ष में लाखों फल और पुष्प रहते हैं, उसी प्रकार वासनाओं से युक्त
चित्त में लाखों (पृथ्वी आदि) वृत्तान्त रहते हैं भाव यह है कि सदधिष्ठान के अवष्टम्भ के बल से चित्त
संसार को धारण करता है