Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
आलिङ्ग्य श्वपचश्यामामिह केसरिचर्मणि ।
सुप्तमापीय मैरेयं तिक्तं गजमदेन च ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हाथियों के मद से तीखा मद्य पीकर मैं चाण्डाल
तरुणी का सिंहचर्म पर आलिंगन कर यहाँ पर सोया था