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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

कौलेयककुटुम्बिन्यः पिण्याकपलवर्धिताः । इह बद्धा वरत्राभिर्मृतेभरदकाष्ठके ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ पर मैंने मांस और खल से पुष्ट हुई कुत्तियाँ मृत हाथियों के दांत रूपी खूँटों पर रस्सियों से बाँधी थी