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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

इह वारणमुक्तानां ददासीत्पिठरत्रयम् । पिनद्धं माहिषेणोग्रचर्मणाम्बुदशोभिना ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ पर हाथियों के मोतियों की तीन उखाओं के (थालियों के) परिमाणवाला हाथियों के दाँतों का पात्र था, जो काले मेघ की शोभा को धारण किये हुए भसे के चर्म से ठका हुआ था