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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

तथाहि बहवः स्वप्नमेकं पश्यन्ति मानवाः । स्वापभ्रमदमैरेयमदमन्थरचित्तवत् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

देखो न बहुत से लोग एक ही स्वप्न देखते हैं जैसे कि निद्रा के समान भ्रमप्रद मदिरा के मद से मत्त चित्तवाले बहुत से समानरूप से घूम रही-सी दिशाओं को देखते हैं