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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

इदं तु शृणु वक्ष्यामि यथाभूतमनिन्दितम् । यथैति तनुतां चिन्ता मार्गशीर्षलतेव ते ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं तुम्हारे चाण्डाल निन्दा सम्बन्ध को प्रगटानेवाले यथार्थ विषय को कहूँगा, तुम इसे सुनो, इससे मार्गशीर्ष की लता के तुल्य तुम्हारी चिन्ता नष्ट हो जायेगी