Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
भूतास्त्वमिव कीराश्च दृष्टवन्तस्तथा भ्रमम् ।
मुधैवेत्यपि सत्याभं समकालादिसंभवात् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
भूतदेशवासियों और कीरदेशवासियों ने
तुम्हारी ही तरह मिथ्या होते हुए भी सत्य की तरह वैसा भरम देखा, क्योकि समान संकल्प से समान
काल आदि का संभव हे