Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
भवतः केवलं चित्ते जलान्तर्वर्तिनस्तदा ।
प्रतिभाता तथाभूता कटंजाचारसंस्थितिः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
यदि उस प्रकार का अन्य पुरुष हुआ, तो उसका वृत्त मेरे अनुभव पथ में कैसे आरूढ़ हुआ। इस
प्रकार की आशंका होने पर कहते है ।
तब जल के अन्दर डूबे हुए तुम्हारे मन मेँ उस प्रकार की कटंज के आचार की स्थिति भ्रान्ति से
केवल प्रतिभासित हुई, क्योकि ऐसा ही तुम्हारा संकल्प था