Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तेनाङ्ग तव वृत्तान्तं यथावत्कथयन्ति ते ।
प्रतिभासो हि नायाति पुनरप्रतिभासताम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वे भी अपनी भान्ति से ही वैसा कहते हैं, इसलिए उनके वचन का संवाद सत्यता का आपादक नहीं
है, ऐसा कहते हैं।
इसलिए वे तुम्हारे वृत्तान्त को जैसे का तैसा कहते हैं । बाधक ज्ञान के बिना प्रतिभास (भ्रम)
अभ्रमता को प्राप्त नहीं होता