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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

केनचिच्छ्वपचेनान्ते ग्रामस्य रचितं गृहम् । तत्त्वया दृष्टमाविष्टमिष्टकाखण्डतां गतम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

किसी चाण्डाल द्वारा गाँव के छोर पर बनाया गया मकान, जो कि यह पहले मैंने बनाया था यों तुम्हारे भ्रान्तिजनित आग्रह का विषयीभूत है और अब ईटों के टुकड़ों के रूप में परिणत हो गया है, तुमने देखा था