Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 5, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
वीतरागो निरायासो विमलो वीतकल्मषः ।
नादाता न परित्यागी विज्वरो भव राघव ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप विषयों के राग से रहित, क्लेशशून्य; निर्मल, निष्पाप, न ग्रहण करनेवाले
और न त्याग करनेवाले एवं सन्ताप शून्य होइये