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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 5, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

विविक्तः शान्तसंकल्पो धीरधीर्विजिताशयः । यथाप्राप्तानुवर्ती च विज्वरो भव राघव ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, आप अविद्या ओर उसके कार्यो से विशुद्ध (अविद्या ओर अविद्या के कार्य से रहित) शान्त संकल्प (जिनका संकल्प निवृत्त हो गया है), धीरमति, स्वाधीनचित्त, जैसे मिला उसका अनुसरण करनेवाले ओर सन्तापरहित होइए