Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 5, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
समः स्वस्थः स्थिरमतिः शान्तशोकमना मुनिः ।
मौनी वरमणिस्वच्छो विज्वरो भव राघव ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप सर्वत्र सम, अपने स्वरूप में स्थित, स्थिर बुद्धि, शोकरहित मनवाले मुनि,
मौनी, सुन्दरमणि के समान निर्मल ओर सन्तापरहित होइये