Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 5, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
शास्त्रसज्जनसत्कार्यसङ्गेनोपहतैनसाम् ।
सारावलोकिनी बुद्धिर्जायते दीपिकोपमा ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
शास्त्र के अभ्यास, सज्जनो की संगति और सत्कर्मो के आचरण से
जिनके पाप नष्ट हो चुके, ऐसे महात्मा पुरुषों की सार वस्तु का अवलोकन करनेवाली दीपक के तुल्य
बुद्धि उत्पन्न होती है