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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 5, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 5, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

ये सत्त्वजातयः प्राज्ञास्तथा राजससात्त्विकाः । विचारयन्ति ते साधो जगत्पूर्वपरम्पराम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

किस उपाय से उसका त्याग करते हैं, ऐसे प्रश्न होने पर उस उपाय को कहते हैं। हे साधो, शुद्धसात्विक जन्मवाले अथवा राजस-सात्त्विक जन्मवाले प्रज्ञ पुरुष ही जगत की मूल परम्परा का विचार करते हैं