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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । एवमेषातिवितता दुर्ज्ञाना रघुनन्दन । महामोहमयी माया विषमा पारमात्मिकी ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्व सर्गोमि वर्णित गाधि के वृत्तान्त की प्रस्तुत कथा में योजना करते हैं। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रघुनन्दन, इस प्रकार अत्यन्त फैली हुई यह महामोहमयी विषम माया अचिन्तनीय है, एकमात्र परमात्मा ही इसका आश्रय और विषय है

सर्ग सन्दर्भ

उनचासवाँ सर्ग समाप्त प्रचासवाँ सर्ग चित्त के आक्रमण केउपायों का, उत्तम ज्ञान के माहात्म्य का तथा चित्तरूपी सर्प के स्थूलतारूपी दोष के हेतुओं का वर्णन ।