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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

सचित्तं चेतनं यावत्तावत्संकल्पकल्पनम् । सचन्द्रांशु जगद्यावत्तावत्प्रालेयलेशकाः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार चित्त के रहने पर संकल्पो का भी वारण नहीं किया जा सकता, ऐसा कहते हैं । जब तक चेतन (चिदात्मरूप) चित्त सहित है तब तक अवश्य संकल्पो की कल्पना होगी, जब तक जगत्‌ चन्द्रमा के किरणों से युक्त रहेगा तब तक ओस की वदे अवश्य होंगी