Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सा सत्यता सा शिवता सावस्था पारमात्मिकी ।
सर्वज्ञता सा सा दृष्टिर्नतु यत्र मनः क्षतम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्तरहित जो चेतनस्वरूप है, वही परमार्थ सत्यता है, वही निरतिशय आनन्दरूपता है, वही
परमात्स्वभावभूत अवस्था है, वही सर्वावभासक चिद्रूपा हे ओर वही परमार्थ दृष्टि है, किन्तु जिस
अवस्था में दुष्ट मन है वह वैसी नहीं है