Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
मनो यत्र तु तत्राशास्तत्र दुःखसुखानि च ।
सदा संनिधिमायान्ति श्मशान इव वायसाः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
निन्यता के बीजों को दिखलाते है ।
जहाँ पर मन रहता है वहीं पर जैसे श्मशान के समीप कोए आते है वैसे ही सदा विविध आशाएँ ओर
सुख-दुख समीप में आते हैं