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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

स्थित्वान्तर्मानसान्पाशानाशारूपानुदारया । धिया धैर्यैकधर्मिण्या निर्धर्माधर्मता व्रज ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

एक मात्र धेर्यधर्मवाली उदार बुद्धि से आशा रूप मानसिक जालो का भीतर उच्छेद कर धमधिर्म रहित होड्ये