Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
तदोदेति महामोहः संसृतिभ्रमकारणम् ।
निर्मलाया निरंशायाः संवित्तेश्चामतिर्यदा ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
जब निर्मल ओर
अखण्ड चैतन्य का अज्ञान होता है तब संसाररूपी भ्रम का कारणरूप महामोह उदित होता है