Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
तेजोंशुषु प्रभावेषु बलिष्वपि महत्स्वपि ।
सर्वेषून्नतियुक्तेषु तत्त्वज्ञः परमोन्नतः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
तेज के कार्य प्रकाशनों मे, योगसिद्धि
के वशित्व आदि प्रभावों में, शारीरिक बलवानों में, ऐश्वर्य, आयु आदि से श्रेष्ठों में तथा वाग्मता आदि
उन्नति से युक्त सबमें तत्त्वज्ञानी परम उन्नत है। सब उन्नतिर्यो तत्त्वज्ञानी में अध्यस्त हैं, यह अर्थ
है