Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
भान्तीह भासा यस्यार्कवह्नीन्दुमणितारकाः ।
तथा जगति राजन्ते ज्ञातज्ञेया नरोत्तमाः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञानी श्रेष्ठ पुरुष जिस जगदीश्वर की दीप्ति से सूर्य अग्नि, चन्द्रमा, मणि और तारा
दीप्त होते हैं, उसके तुल्य सुशोभित होते हैं