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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 63

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

आगमापायवपुषा विषवैषम्यशंसिना । भोगाभोगेन भीमेन चेतो गच्छति पीनताम् ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

विष से जैसी दाह, मूर्च्छा ओर व्याकुलता होती है वैसी दाह, मूर्च्छा ओर व्याकुलता को सूचित करनेवाले भीषण भोगों के सेवन से, जिसके स्वरूप ओर स्वभाव आवागमनवाले हैँ, चित्त स्थूलता को प्राप्त होता हे