Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
दुराशाक्षीरपानेन भोगानिलबलेन च ।
आस्थादानेन चारेण चित्ताहिर्याति पीनताम् ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
दुराशारूपी दुग्ध के पान से, भोगरूपी पवन के बल से, आदरप्रदान
से तथा नाना विषयों में संचार से चित्तरूपी सर्प स्थूलता को प्राप्त होता है