Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
स्नेहेन धनलोभेन लाभेन मणियोषिताम् ।
आपातरमणीयेन चेतो गच्छति पीनताम् ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
स्त्री, पुत्र आदि के प्रति स्नेह से तथा
मणि और स्त्रियों के लोभ से, जो आपततः रमणीय प्रतीत होता है, उत्पन्न हुए धन के लोभ से चित्त
स्थूलता को प्राप्त होता है