Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 84
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 84 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 84
संस्कृत श्लोक
चित्तेन चेतः शममाशु नीत्वा शुद्धेन घोरास्त्रमिवास्त्रयुक्त्या ।
चिराय साधो त्यज चञ्चलत्वं विमर्कटो वृक्ष इवाक्षतश्रीः ॥ ८४ ॥
हिन्दी अर्थ
वैराग्य से संकल्प पर विजय पाने से चित्त शुद्धि होने पर उसी प्रकार ज्ञान ओर समाधि के क्रम से
चित्त पर विजय भी हो जाती है, ऐसा कहते है ।
हे साधु शिरोमणे, जैसे अस्त्र के प्रयोग से घोर अस्त्र का शमन किया जाता हे वैसे ही शुद्ध चित्त से
चित्त का शीघ्र शमन कर आप बन्दर से छुटकारा पाये हुए वृक्ष जिसकी शोभा नष्ट- भ्रष्ट नहीं हुई उसके
समान चिरकाल तक चंचलता को त्याग कीजिये