Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
कदा शममुपैष्यन्ति ममान्तर्भोगसंविदः ।
आलोलकल्लोलरवा ऊर्मयोऽम्बुनिधाविव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे चंचल
(अशान्त) कल्लोलों की ध्वनि के समान ध्वनिवाली तरंगे समुद्र मँ शान्त हो जाती हैं वैसे ही मेरे अन्दर
भोग तृष्णाएँ, जिनकी ध्वनि शान्त कल्लोलों की ध्वनि के समान गंभीर है, कब शान्त होगी ?