Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
इदं कृत्वेदमप्यन्यत्कर्तव्यमिति कल्पनाम् ।
कदान्तर्विहसिष्यामि पदविश्रान्तया धिया ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
मुझे यह कार्य करके यह भी दूसरा कार्य कर्तव्य है, इस कल्पना का मैं परमपद में विश्रान्त बुद्धि से अपने
अन्दर कब उपहास करूँगा ?