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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

कालेन महता क्षेत्रे जातेयं बुद्धिवल्लरी । वृद्धिं विवेकसेकेन नय तां नयकोविद ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे नीतिशास्त्र के मर्मज्ञ, सत्‌कूलरूपी खेत में उत्पन्न हुई देहरूपी लता में चित्तशुद्धि, श्रवण आदि (देहरूपी) उपायों से यह परमात्म ज्ञानरूप आपकी बुद्धि लता चिरकाल में उत्पन्न हुई हे । इसे आप विवेकरूपी जल के सेक से बढ़ाइये