Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
यावन्म्लायति नो कायलतिका कालभास्वता ।
भूतलेऽपतितां तावदेनामुद्धृत्य धारय ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह बाल्यावस्था से यदि सीची जाय, तो बढ़ती है । वृद्धावस्था आदि से देहरूपी लता के मुरझाने
पर उसके गिरने की शंका से उसका उद्धार भी नहीं हो सकता उसकी म॑जरियो को बढ़ाना तो दूर की
बात रही, ऐसा कहते हैँ ।
जब तक कालरूपी सूर्य से यह देहरूपी लता मुरझाती नहीं तभी तक पृथ्वी पर न गिरी ही इस देह
लता का गुरुसेवा, श्रवण आदि से उद्धार कर बुद्धिरूपी लता का पालन कीजिये