Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
कदा विकल्पपर्यस्तं मनो दोलावदोलनम् ।
शममेष्यति मे शान्तवातौजस इव भ्रमः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जिसका उन्माद रूपी
वात रोग निवृत्त हो चुका हो ऐसे पुरुष की विक्षिप्तता शान्त हो जाती हे वैसे ही विकल्पों से विक्षिप्त,
झूले के समान अशान्त मेरा मन कब शान्ति को प्राप्त होगा ?