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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

कदोदितवपुर्भासा विहसञ्जागतीर्गतीः । अन्तः संतोषमेष्यामि विराडात्मेव पूर्णधीः ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

आविरभूत हुए स्वरूप के प्रकाश के छिटकने से जगत्‌ की विविध गतियो का उपहास कर रहा मैं ब्रह्माण्ड शरीरवाले (सर्वव्यापक) आत्मा के समान परिपूर्ण बुद्धि होकर कब अन्तःकरण में सन्तोष को प्राप्त होऊँगा ?