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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 38

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

इति चिन्तापरवशो वन उद्दालको द्विजः । पुनः पुनस्तूपविशन्ध्यानाभ्यासं चकार ह ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार की चिन्ताओं से परवश हुए उद्दालक नाम के ब्राह्मण ने बार-बार ध्यान में बैठते हुए वन में ध्यानाभ्यास किया