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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

विषयैर्नीयमाने तु चित्ते मर्कटचञ्चले । न स लेभे समाधानप्रतिष्ठां प्रीतिदायिनीम् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

किन्तु विषयों से हरे जा रहे अतएव बन्दर के समान चंचल चित्त में प्रसन्नता प्रदान करने वाली समाधि स्थिरता उन्हे नहीं मिली