Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
पुष्पप्रकरसंछन्नां मृदुशाद्वलकोमलाम् ।
ज्योतीरसाश्मसंप्रोतैः कृतां मरकतैरिव ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
पुष्पों की राशियों से वह कन्दरा चारों ओर आच्छन्न थी, नरम हरी घास से ढकी होने से बड़ी भली
लगती थी, अतएव मालूम होता था कि मानों ज्योतिरूप रस के (चन्द्रमा के) पत्थरों के साथ यानी
चन्द्रकान्त मणियों के साथ जोडी हुई मरकत मणियों से बनाई गई है