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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

कुलम्बनाहिमालोकां नात्युष्णां नातिशीतलाम् । शारदस्योदितार्कस्य हेमगौरीं प्रभामिव ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके दरवाजे पर केवल शीत निवारण करनेवाले आलोक फलते थे, शरद्‌ ऋतु के प्रातःकालीन सूर्य की प्रभा के समान न वह अति उष्ण थी ओर न अति शीतल थी । सुवर्ण के समान पीला उस का रंग था