Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
रसनाभावमागत्य गर्द्धेनान्ध दुरन्धसाम् ।
मा नाशमेहि बडिशपिण्डीलम्पटमत्स्यवत् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
अरे अन्धे मन, दुष्ट अन्नो की
अभिलाषा से रसनेन्द्रियता को प्राप्त होकर बंसी में वधे हुए मांस के टुकड़े पर (चारे पर) लोलुप मछली
के समान तू नाश को प्राप्त मत हो