Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
समाधानोन्मुखतया प्रविशन्स व्यराजत ।
सर्गव्यापारविरतावात्मपुर्यामिवाब्जजः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सृष्टि-रचना से वैराग्य होने पर सत्यलोक में स्थित
अपराजिता नाम की अथवा भगवन्नाभिकमल रूप अपनी नगरी में प्रवेश कर रहे ब्रह्माजी विराजमान
होते हैं वैसे ही समाधिप्रविणता से उस गुफा में प्रवेश कर रहे वे विराजित हुए